अकबर के शीर्ष सेनापतियों में एक आमेर के राजा मान सिंह एक बार बंगाल (अब बांग्लादेश) के शहर गौड़ गए. तब वहां के काली माता के प्रसिद्ध मंदिर जेसौर में दर्शन करने पहुंचे. वहां जेसौरेश्वरी काली माता की मूर्ति देखकर बहुत प्रभावित हुए और जाते हुए अपने साथ माता की मूर्ति को भी ले गए और आमेर में अपने पैलेस में मंदिर में स्थापित करवा दिया. मंदिर के पुजारी को भी वे अपने साथ ले गए जिसके पुरखे आज भी आमेर मंदिर में पूजा करते हैं. वहीं आमेर के किले के प्रांगण में, तहखाने में, जमीन में और दीवारों में बहुत विशाल मात्रा में सोना, चांदी और हीरे-जवाहरात छुपाकर रखे गए थे ताकि आपात परिस्थिति में जनता के काम आ सकें. इस खजाने को अभिशप्त किया हुआ था कि अगर किसी और कारण से इसका इस्तेमाल हुआ तो इसे रखने वाले का खानदान खत्म हो जाएगा. जब संजय गांधी ने आपातकाल के बहाने सारा खजाना ट्रकों में भरकर वहां से निकालकर अपने कब्जे में ले लिया तो उन्हें नहीं पता था कि उसमें उन्हीं काली माता के गहने भी थे. इसी के साथ गांधी परिवार की बर्बादी शुरू हो गई. पहले संजय प्लेन क्रैश में मारे गए, फिर इंदिरा गांधी की हत्या हुई और उसके बाद राजीव गांधी की.

इंदिरा के बेटे संजय गांधी ने जयपुर के पास आमेर में सात दिन का कर्फ्यू लगा दिया था. आदेश था कि कोई भी सड़कों पर दिखा तो उसे गोली मार दी जाए. तब कोई हिंदु-मुस्लिम दंगे भी नहीं हो रहे थे लेकिन केंद्र सरकार ने पूर्वाग्रह के नाते ऐसा किया. किसी ने संजय को कहा कि आमेर में राजा मान सिंह का विशाल खजाना गड़ा है तो उसने इमरजेंसी की आड़ में सेना भेजी. खुदाई में 60 ट्रक सोना, चांदी और जवाहरात मिले. सबकी नजरों से बचाकर इसे जयपुर से दिल्ली ले जाया गया. वहां नई दिल्ली के इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर इंदिरा गांधी ने दो विशाल प्लेन तैयार रखे हुए थे. वहां से संजय और इंदिरा ने उस खजाने को स्विट्जरलैंड भिजवा दिया.

अगस्त 1975 में रूस के वीकली न्यूजपेपर सेंट पीटर्सबर्ग टाइम्स ने जब गायत्री देवी को जेल करने की खबर पब्लिश की तो उसमें खजाने की खुदाई और उसमें मिले सामान की जानकारी भी दी गई थी. इसके मुताबिक, “बीती फरवरी सरकार ने कहा कि उसके जांचकर्ताओं को 1.70 करोड़ डॉलर कीमत की करंसी, डायमंड, एमेरल्ड और कीमती धातुएं मिलीं जो महारानी और उनके परिवार की थीं. इनमें सोने के सिक्कों और बुलियन का ज़ख़ीरा भी मिला जो एक पैलेस की जमीन के नीचे एक गुप्त तहखाने में छुपाया हुआ था जिसकी कीमत करीब 50 लाख डॉलर है.”