ह्मास्त्र का अर्थ होता है ब्रह्म (ईश्वर) का अस्त्र। ब्रह्मास्त्र एक दिव्यास्त्र है जो परमपिता ब्रह्मा का सबसे मुख्य अस्त्र माना जाता है। एक बार इसके चलने पर विपक्षि प्रतिद्वन्दि के साथ साथ विश्व के बहुत बड़े भाग का विनाश हो जाता है। इस शस्त्र को शास्त्रों में सबसे विनाशक शस्त्र का दर्जा प्राप्त है, रामायण औऱ महाभारत काल में इस शस्त्र का वर्णन मिलता है जिसमें हमें इसकी मारक क्षमता का पता चलता है।


शास्त्रों में कहा जाता है कि यदि दो ब्रह्मास्त्र आपस में टकराते हैं तो तब समझना चाहिए कि प्रलय ही होने वाली है। इससे समस्त पृथ्वी का विनाश हो जाएगा और इस प्रकार एक अन्य भूमण्डल और समस्त जीवधारियों की रचना करनी पड़ेगी.प्राचीन भारत में कहीं-कहीं ब्रह्मास्त्र के प्रयोग किए जाने का वर्णन मिलता है। रामायण में भी मेघनाद से युद्ध हेतु लक्ष्मण ने जब ब्रह्मास्त्र का प्रयोग करना चाहा तब श्रीराम ने उन्हें यह कहकर रोक दिया क‍ि अभी इसका प्रयोग उचित नहीं, क्योंकि इससे पूरी लंका साफ हो जाएगी।

वेद-पुराणों आदि में वर्णन मिलता है जगतपिता भगवान ब्रह्मा ने दैत्यों के नाश हेतु ब्रह्मास्त्र की उत्पति की। प्रारंभ में ब्रह्मास्त्र देवी और देवताओं के पास ही हुआ करता था। प्रत्येक देवी-देवताओं के पास उनकी विशेषता अनुसार अस्त्र होता था। देवताओं ने सबसे पहले गंधर्वों को इस अस्त्र को प्रदान किया। बाद में यह इंसानों ने हासिल किया।ब्रह्मास्त्र प्रचीन भारत का सबसे शक्तिशाली अस्त्र था जो बहुत दुर्लभ और बहुत कम ही लोगों के पास था। माना जाता है कि ब्रह्मास्त्र सिर्फ उन्हीं लोगों को दिया जाता था जो कटोर तप करके भगवान को खुश करते थे, और भगवान उन्हें खुश होकर यह शस्त्र दिया करते थे। शास्त्र बताते हैं कि जब भी इसका या इसके समान दूसरे किसी भी अस्त्र-शस्त्र का प्रयोग हुआ है हमेशा पृथ्वी औऱ अनेक लोकों में जीवन का नाश हुआ है।