मनोहर पर्रिकर के निधन के बाद भारतीय जनता पार्टी के प्रमोद सावंत गोवा के मुख्यमंत्री बनाए गए हैं. सावंत ने सोमवार देर रात दो बजे गोवा के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली.46 साल के सावंत आरएसएस काडर से आने वाले गोवा में बीजेपी के अकेले विधायक हैं. इससे पहले वह पार्टी के प्रवक्ता और गोवा विधानसभा के अध्यक्ष रहे हैं.

गोवा बीजेपी के नेता 45 साल के डॉ प्रमोद सावंत का जन्म 24 अप्रैल 1973 को हुआ. सैंकलिम विधानसभा क्षेत्र से चुनकर आए डॉ प्रमोद सावंत का पूरा नाम डॉ प्रमोद पांडुरंग सावंत है. उनकी मां पद्मिनी सावंत और पिता पांडुरंग सावंत हैं.प्रमोद सावंत ने आयुर्वेदिक चिकित्सा में महाराष्ट्र के कोल्हापुर की गंगा एजुकेशन सोसायटी से ग्रेजुएशन किया था. इसके बाद उन्होंने सोशल वर्क में पोस्ट ग्रेजुएशन पुणे की तिलक महाराष्ट्र यूनिवर्सिटी से किया. प्रमोद सावंत किसान और आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति के प्रेक्टिशनर हैं.

राजनीति में आने से पहले वह सरकारी नौकरी कर रहे थे. वह मापुला स्थित उत्तरी जिला अस्पताल में आयुर्वेद के डॉक्टर के तौर पर तैनात थे. साल 2008 में सैनक्वलिम सीट खाली हुई थी जिससे उनको चुनाव लड़ने को कहा गया. इसके बाद उन्होंने अपनी सरकारी नौकरी छोड़ दी और पूरी तरह से राजनीति में आ गए. हालांकि, इस उपचुनाव में उनकी हार हुई लेकिन वह राजनीति में ही सक्रिय रहे. सावंत ने आयुर्वेद औषधि में ग्रैजुएशन के बाद पोस्ट ग्रैजुएशन सामाजिक कार्य में किया. उन्होंने मेडिको-लीगल सिस्टम का भी अध्ययन किया है.साल 2012 में वह पहली बार विधायक बने. इसके बाद 2017 के विधानसभा चुनाव में वह एक बार फिर वह सैनक्वलिम से निर्वाचित होकर गोवा विधानसभा में आए और मनोहर पर्रिकर के नेतृत्व वाली सरकार में उन्हें विधानसभा अध्यक्ष बनाया गया

गोवा के राजनीतिक इतिहास में वह सबसे कम उम्र के विधानसभा अध्यक्ष थे. गोवा के युवा आंदोलन में उनके असाधारण कौशल के कारण उनको राज्य युवा पुरस्कार से नवाजा गया. वह भारतीय युवा जनता मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष और भारतीय जनता युवा मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष रहे हैं.
बता दें 40 सीटों वाले गोवा विधानसभा की 3 सीटें फिलहाल खाली है, जिनपर 23 अप्रैल को उपचुनाव होना है. ऐसे में फिलहाल 37 सीटों में बहुमत का आंकड़ा 19 सीटों का है. सत्तारूढ़ बीजेपी (12) के पास महाराष्ट्र गोमंतक पार्टी (3) गोवा फॉरवर्ड पार्टी (3) और 3 निर्दलीय समेत 21 विधायकों का समर्थन है. जबकि, कांग्रेस के पास 14 विधायक हैं. ऐसे में अगर बीजेपी के सहयोगी दलों का एक भी विधायक झटका देता है, तो बीजेपी गोवा में सरकार खो सकती है.