मराठा इतिहास में येसु बाई को काफी सम्मानजनक स्थान प्राप्त है .येसू बाई पिलाजीराव शिरके,एक मराठा सरदार (मुखिया) जो कि छत्रपति शिवाजी की सेवाओं में थे, की बेटी थीं।एक संधि के तहत शिवाजी महाराज ने बाई और शम्भा जी की शादी की थी. शम्भा जी की गिरफ्तारी और मौत के बाद 19 साल के राजा राम को राजा बनाया गया. राजा राम ने शम्भाजी द्वारा बंदी बनाए गए सभी सरदारों मुक्त कर दिया और उनकी मदद से राजधानी की सुरक्षा की तैयारी करने लगे. जल्द ही औरंगजेब का सेनापति जुल्फिकार खां आक्रमण के लिए आ पहुंचा .यहीं से येसु बाई ने अपने हाथ में मराठा साम्राज्य की बागडोर ले ली.
येसु बाई ने राजा राम को कई प्रमुख सरदारों के साथ सुरक्षित विशालगढ़ के किले में भेज दिया और जुल्फिकार खान से मुकाबले के लिए शस्त्र उठा लिया. येसु बाई से प्रेरणा पाकर मराठों ने मुगलों के इलाके पर धावा बोला और जबरदस्त लूटमार मचा दी. उन्होंने खान को चारों तरफ से घेर लिया और रसद आने पर पाबंदी लगा दी .येसु बाई की इस घेरे बंदी से जुल्फिकार खान स्तब्ध रह गया .खान समझ गया की बाई से सीधी लड़ाई संभव नहीं है इसलिए उसने एक चाल चली.

येसूबाई की सेना में सूर्या पिसाल नाम का एक किलेदार था जो वाई का जमींदार बनना चाहता था ,खान ने जमींदारी का लालच देकर उसे अपनी तरफ मिला लिया. जैसे ही खान ने सेना लेकर येसु बाई के किले पर हमला बोला पिसाल ने किले का द्वार खोल दिया. जब रायगढ़ के मराठा किले पर मुग़लों द्वारा 1689 में कब्जा कर लिया गया था, तब येसूबाई को उनके युवा पुत्र शाहु के साथ कैद कर लिया गया था। हालांकि उनको हर जगह औरंगजेब के साथ ले जाया जाता था पर फिर भी औरंगजेब ने कभी उनका ध्यान नहीं रखा। 1707 में औरंगजेब की मृत्यु के बाद, उनका बेटा आजम सम्राट बना और उसने मराठा रैंकों में विभाजन को प्रोत्साहित करने के लिए, शाहु को कैद से मुक्त कर दिया .हालांकि, मुग़लों ने येसूबाई को एक दशक के लिए कैद में रखा था, यह सुनिश्चित करने के लिए कि शाहु अपनी रिहाई पर हस्ताक्षर किए गए संधि की शर्तों पर ध्यान रखे।

येसु बाई लगभग तीस सालों तक औरंगजेब की कैद में रही.आखिर 1719 में, पेशवा बालाजी विश्वनाथ भट ने उन्हें एक व्यापक संधि के साथ छुड़वा लिया जिसे मुग़लों की मान्यता प्राप्त थी और उसमें शाहुजी को शिवाजी का असली उत्तराधिकारी माना गया था।