लोकसभा चुनाव 2019 की घोषणा हो चुकी है लेकिन सत्ता के बाजीगर बाबा रामदेव अब तक खामोश हैं. पिछले चुनाव में बाबा ने बीजेपी को सत्ता में लाने के लिए काफी कदमताल किया था लेकिन इस बार उनकी चुप्पी हैरत में डाल रही है .वैसे बाबा से व्यापारी बन चुके बाबा रामदेव के लिए सत्ता एक ऑक्सीजन की तरह जिसमें उनका पतंजलि प्रोडक्ट फलता फूलता है .एक मामूली से योगगुरु से हजार करोड़ की सम्पति तक का सफ़र तय करने वाले बाबा इसे अपने स्वदेशी अभियान का हिस्सा बताते हैं जबकि उनकी ज्यदातर सम्पति विदेशों में है .बाबा रामदेव की संपत्ति सिर्फ हरिद्वार में बने पतंजलि योग पीठ में ही नहीं है बल्कि एक खबर ये भी आई कि बाबा रामदेव ने करीब पंद्रह करोड़ रुपये में एक स्कॉटिश टापू भी लिया है। इसके अलावा खबरों के मुताबिक बाबा ने धार्मिक चैनल आस्था का भी बड़ा हिस्सा खरीद लिया है। इस चैनल में बाबा रामदेव की योग क्लास दिखाई जाती हैं। बहरहाल आइये जानते हैं बाबा रामदेव के बारे में कुछ ख़ास बातें …

बाबा रामदेव का जन्म 12 दिसम्बर 1965 को हरियाणा जिले के महेन्द्रगढ़ जिले में नारनौल नामक गांव में हुआ था। इनका ब्रांड ‘पातंजलि’ जिस नाम से इन्होंने स्वदेशी उत्पादों का निर्माण शुरू किया, आज हर प्रकार के उत्पाद बनाती है। रामदेव जगह-जगह स्वयं जाकर योग-शिविरों का आयोजन करते हैं, जिनमें हर सम्प्रदाय के लोग आते हैं।

।1875 में लिखी दयानंद सरस्वती की किताब ‘सत्यार्थ प्रकाश’ का रामदेव पर गहरा असर पड़ा था। सरस्वती के इसी प्रभाव के कारण रामदेव कभी फोन पर हैलो नहीं कहते। इसके बजाय वह ओम का जाप करते हैं। बाबा रामदेव के प्रेरणास्रोत रामप्रसाद बिस्मिल और सुभाष चंद्र बोस भी रहे हैं। इन्‍होंने हिमालय की कंदराओं में भी मेडिटेशन और स्‍वअनुशासन का अभ्‍यास करते हुए काफी दिन बिताए हैं।

शुरुआती दिनों में रामदेव योग की छोटी-छोटी क्लासेस देते थे और कई जगह छोटे-छोटे कैंप लगाते थे जिनमें आने वाले लोगों की संख्या मात्र 30 से 40 हुआ करती थी, लेकिन योग से लोगों को फर्क पड़ने लगा तो बाबा ने इसकी फ़ीस रख डाली। लोग बताते हैं कि बाबा उस वक्त फ़ीस के एवज में 30 से 50 रुपया लिया करते थे। बाद में आस्‍था चैनल पर योगा के प्रोग्राम से इन्‍हें लोकप्रियता मिली।बाबा रामदेव ने आज भी अपना बजाज कंपनी का 90 के दशक का स्कूटर संभाल कर रखा है। इस स्कूटर पर वह दवाइयां बेचते थे। यह उन्हें आज भी बहुत अजीज है।

 

बाबा रामदेव और पतंजलि के सीईओ आचार्य बालकृष्ण आपस में संस्कृत में बातें करते हैं। हालांकि आम जनता के सामने वे हिंदी में ही बोलते हैं।रामदेव पूरी तरह से स्वदेशी अपनाने वालों में से हैं। इसकी सलाह वे अन्य लोगों को भी देते हैं। इसलिए वे आज भी महिंद्रा की स्कॉर्पियो से ही आना-जाना करते हैं। फोन भी वे माइक्रोमैक्स का इस्तेमाल करते हैं। यहां तक कि वे भरी गर्मी में भी सोने के लिए एसी का इस्‍तेमाल नहीं करते हैं।

बाबा रामदेव हमेशा फर्श पर ही सोते हैं। हालांकि उनके कमरे में एक वीडियोकॉन का टीवी और पढ़ाई की टेबल जरूर है, लेकिन वे सोने के लिए फर्श का इस्तेमाल करते हैं।

बाबा रामदेव रोज 18 से 20 घंटे काम करते हैं। रोज सुबह 3 बजे जगकर ही एक्‍सरसाइज में लग जाते हैं। ये शाकाहारी है और अनाज बिलकुल नहीं खाते बल्कि हमेशा फ्रूट्स का सेवन करते है और जूस का भी अधिक से अधिक सेवन करते है।

बाबा रामदेव पश्चिमी पकवानों से बहुत ही घृणा करते है और सॉफ्ट ड्रिंक्‍स को टॉयलेट क्लीनर्स बताते है।10 हालांकि बाबा आठवीं कक्षा के बाद ही पढ़ाई छोड़ कर घर से भाग गए थे और योग सीखने लगे थे पर इनके पास चार-चार यूनिवर्सिटीयों से मिली डॉक्‍टरेट की डिग्री है।