गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में सोमनाथ का मंदिर स्थित है .इस मंदिर के वैभव का आलम कभी ये था कि इस मंदिर का घंटा 200 मन शुद्ध सोने का हुआ करता था. मंदिर के 56 खम्भों पर हीरे , मोती, मानिक और रत्न आदि जड़े हुए थे. इस ट्रस्ट के पास दस हजार गाँवों की जागीर भी हुआ करती थी .जिसकी आमदनी मंदिर के कोष में जाती थी .इस मंदिर के बनने की जो कथा स्कन्दपुराण में वर्णित है वो कुछ इस प्रकार है

चंद्रमा ने दक्ष की 27 पुत्रियों से विवाह किया था लेकिन उनका सारा अनुराग केवल रोहिणी से था जिसे उनकी बाकी पत्नियाँ खुद को उपेक्षित समझती थी. पति से निराश होकर बाकी पत्नियों ने इसकी शिकायत दक्ष से की.जिससे नाराज दक्ष ने चंदमा को कोढ़ी होने का श्राप दे दिया. इस श्राप से दुखी होकर चंद्रमा ब्रह्मा के पास पहुंचा . ब्रह्मा ने उन्हें इसका उपाय बताते हुए कहा कि जाकर प्रभाष क्षेत्र में भगवान् शंकर की उपासना करें तभी उन्हें इस शाप से मुक्ति मिल सकती है. चंद्रमा की तपस्या से प्रसन्न होकर शिव जी ने चंद्रमा को प्रतिदिन एक एक कला नष्ट होने और दूसरे पक्ष में प्रतिदिन बढ़ने का वर दिया. चंद्रमा से प्रसन्न होकर शिवजी सोमेश्वर नाम से वहीं अवस्थित हो गए .

देवताओं ने उस स्थान पर सोमेश्वर कुंड की स्थापना की .इस कुंड में स्नान कर सोमेश्वर ज्योतिर्लिंग की पूजा से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं, बाद में इसी स्थान पर एक भव्य मंदिर का निर्माण किया गया जिसे आज सोमनाथ मंदिर के नाम से जाना जाता है .