क्रिकेट के मैदान पर अक्सर खिलाड़ियों के बीच आपसी झड़प और कहासुनी जैसे कई अन्य विवाद देखने को मिलते हैं। इसके अलावा खिलाड़ियों की निजी जिंदगी में भी चल रहे विवादों की खबरें लगातार मिलती रहती हैं। लेकिन क्या कभी आपने किसी क्रिकेट खिलाड़ी को फांसी की सजा सुनाए जाने के बारे में नहीं सुना है? अगर नहीं तो आइये आज आपको ऐसे इकलौते खिलाड़ी के बारे में बताते हैं, जिसे सजा ए मौत सुनाई गई थी। बता दें कि इस खिलाड़ी ने 1934-35 में ‘RES वायट्स इंग्लिशमेन’ के खिलाफ अपने करियर की पहली टेस्ट सीरीज खेली थी। यह खिलाड़ी फास्ट बॉलर था और इसने सीरीज में 13 विकेट झटके थे।इस खिलाड़ी का नाम लेस्ली हिल्टन था। लेस्सी वेस्टइंडीज के लिए खेलते थे और वो इकलौते क्रिकेट खिलाड़ी हैं, जिन्हें फांसी की सजा सुनाई गयी थी।

हिल्टन ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में वेस्टइंडीज की तरफ से 6 टेस्ट खेलकर 19 विकेट झटके थे। इसके साथ ही उस समय उनका ऐवरेज 26। 12 था।हिल्टन ने जमैका के इंस्पेक्टर की बेटी लर्लिन रोज से 1942 में लव मैरिज की। इसके बाद उन दोनों का एक बेटा भी हुआ। लेकिन दोनों के बीच 1954 में हालात तब बिगड़ गए जब हिल्टन को एक अंजान चिट्ठी मिली।इस चिट्ठी में लिखा था कि उनकी बीवी के ब्रूकलीन एवेन्यू में रहने वाले रॉय फ्रांसिस से नाजायज संबंध हैं। इस चिट्ठी को पढने के बाद हिल्टन ने तहकीकात शुरू की और इस बात को सही पाया।हिल्टन ने अपनी पत्नी से जब इस बारे में पूछा तो उनका जवाब सुनकर वो आंख बबूला हो गया।दरअसल हिल्टन की पत्नी ने जवाब दिया था कि तुम में मेरे लेवल की क्लास है ही नहीं, तुमने मुझे कभी खुश नहीं रखा और तुम्हें देखकर ही मैं बीमार हो जाती हूं।

इसके बाद हिल्टन ने गुस्से में अपनी पत्नी लर्लिन को सात गोलियां मारी। हालांकि बाद में हिल्टन ने कोर्ट में बयान दिया कि मैंने बंदूक खुद को गोली मारने के लिए उठाई थी। लेकिन कोई भला कैसे अनजाने में दूसरे को एक के बाद एक सात गोलियां मार सकता है, इसी तर्क पर कोर्ट ने हिल्टन को 20 अक्टूबर 1954 को फांसी की सजा दे दी। फिर 17 मई 1955 को हिल्टन को तय सजा दी गई।