ठग अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुए, बल्कि अब अंडरग्राउंड हो गए हैं. अभी भी गाहे-बगाहे ये लोग सड़कों पर लोगों से ठगी करते हुए मिल जाते हैं. इनकी पहचान इनके पीले रुमाल से की जा सकती है. 

आमिर खान और अमिताभ बच्चन की फिल्म . ‘ठग्स ऑफ हिंदोस्तान’ रिलीज हो चुकी है. ये आजादी के पहले के दौर की कहानी है. यह फिल्म एक बहुचर्चित नावेल ‘कंफेशंस ऑफ अ ठग’ पर आधारित है जिसके लेखक फिलिप मिडास टेलर थे और यह किताब 1839 में प्रकाशित हुई थी.ये फिल्म दरअसल ठग बेहराम और उनके गैंग्स पर आधारित है. कौन था ये ठग बेहराम ? आइये जानते हैं …

ठगी और ठगों के जानकार बताते हैं कि उन लोगों को हत्याओं के दौरान खून बहाना पसंद नहीं था. ठग मानते थे कि निर्दोष का खून बहाने से देवी नाराज हो जाएंगी. इसलिए उन्होंने हत्या करने का नया तरीका खोज निकाला था. वो लोग पीले रंग के रुमाल से यात्री का गाला घोंट कर हत्या करते थे. अधिकतर हत्याएं शाम या रात के समय यात्रियों के ठहरने की जगह के पास की जाती थीं, जब यात्री थका हुआ या उनींदा होता था. ठग अपनी लूट का एक बड़ा हिस्सा मंदिरों में दान करते थे.
ठगों के भी अपने उसूल थे. उनका उसूल था कि वो किसी महिला, बच्चे, फकीर, संगीतकार, अपाहिज और विदेशियों की हत्या नहीं करते थे. यही उसूल अंत में उनके खात्मे का कारण बना क्योंकि अंग्रेजों के सामने आ जाने पर भी वो अपने उसूलों के चलते उन्हें मारते नहीं थे और अंततः आत्मसमर्पण कर देते थे. कुछ लोगों का मानना है कि ठग अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुए, बल्कि अब अंडरग्राउंड हो गए हैं. अभी भी गाहे-बगाहे ये लोग सड़कों पर लोगों से ठगी करते हुए मिल जाते हैं. इनकी पहचान इनके पीले रुमाल से की जा सकती है.