भारतीय राजनीति के सबसे बड़े स्कैंडल्स में से एक है भंवरी देवी स्कैंडल जिसने ना केवल राजस्थान की सियासत को हिलाकर रख दिया बल्कि भारतीय नेताओं के काले चेहरे को भी सामने लाकर खडा कर दिया . भंवरी देवी एक नर्स थी लेकिन उन्हें एक्टिंग करने का जबरदस्त शौक था. राजस्थानी फिल्मों में हिरोइन बनने के लिए भंवरी देवी भटक रही थी कि तभी उसकी मुलाकात कांग्रेस के नेता मलखान से हुई. जिसके बाद दोनों का मिलना-जुलना होता गया और दोनों की दोस्ती परवान चढ़ती गयी. बाद में दोनों के रिश्ते ने एक बेटी को भी जन्म दिया. इसी दौरान भंवरी के मन में राजनीति करने का भाव जाग उठा. भंवरी ने मलखान के अलावा कांग्रेस नेता परसराम मदेरणा के पुत्र महिपाल मदेरणा से भी दोस्ती कर ली. ये दोस्ती देखते हुए वह मलखान और महिपाल की नजरों में आ चुकी थी.

 

वक्त के साथ वह दोनों नेताओं के करीबी रहने लगी और उसे सत्ता की ताकत का अहसास होता गया. इन दोनों नेताओं की वजह से ही उसकी मुलाकात और भी नेताओं से होती गयी. देखते-देखते ही मामूली भंवरी देवी की जिंदगी पूरी बदल गयी और उसने नया घर बनवाया और नई कार भी खरीदी. इसके बाद अपने बच्चों का एडमिशन नामी स्कूलों में कराया. बता दें अब भंवरी राजनीति में आ चुकी थी. भंवरी को बिना ड्यूटी जाये ही पूरी तनख्वाह मिलने लगी थी. जिसके बाद ने भंवरी ने एमएलए बनने के लिए टिकट मांगना शुरू कर दिया लेकिन महिपाल और मलखान ने उसकी इस मांग को ठुकरा दिया. जिसके बाद उसकी ये इच्छा पूरी नहीं हुई तो उसने इन दोनों नेताओं के साथ अपनी सेक्स सीडी बनवा ली. बस फिर क्या था वह इन सेक्स सीडी के दम पर दोनों नेताओं को धमकाने लगी. जिसके बाद दोनों नेताओं ने उससे दूरी बनाना शुरू कर दिया. उसने फिर भी हार नहीं मानी और वह जयपुर कई नेताओं से मिलने पहुंची. बता दें कि भंवरी के पास सेक्स सीडी यह बात सार्वजनिक होती गयी. फिर भंवरी और दोनों नेताओं के बीच सारे गिले-शिकवे दूर हुए और फिर समझौता हो गया. इसके बाद सभी में बातचीत होना शुरू हो गया. बता दें कि मदेरणा ने मजबूर होकर भंवरी देवी को 60 लाख रूपये देने का वायदा किया था. जिसके लिए वो 10 लाख रूपये पहली क़िस्त भी दे चुके थे.गौरतलब है कि बाद में भंवरी देवी ने अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए विश्नोई समाज के सबसे बड़े खेजड़ली शहीदी मेले में जाने की घोषणा कर दी. उसकी योजना थी कि वह वहां जाकर अपना पक्ष रखकर मांग करेगी. इस मामले में फिर मलखान की बहन इंद्रा बीच में आ गयी और उसने भंवरी का अपहरण कर सीडी छीनने की योजना बना ली. भंवरी ने अगस्त 2011 में अपनी कार बेची और उसी का बकाया चार लाख रूपये देने के लिए 1 सितम्बर को सोहनलाल नामक व्यक्ति ने फोन करके भंवरी को अपने घर बुलाया. जिसके बाद सोहनलाल ने उसका अपहरण कर विशनाराम गैंग को सौंप दिया. उन लोगों को योजना भंवरी से सीडी लेने की थी. लेकिन भंवरी ने रास्ते में ही चिल्लाना शुरू कर दिया. ऐसे में उसे चुप कराने के लिए भंवरी की गला दबाकर हत्या कर दी जाती है. जिसके बाद इस केस में कई मंत्री सजा काट रहे हैं और इस मामले में राजनीति में भूचाल ला दिया था.