रक्षाबंधन में जिस तरह बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांध कर शुभ की कामना करती है ठीक वैसे ही भाईदूज में अपने भाई के लम्बी उम्र, स्वस्थ जीवन की कामना करती है... भाई दूज कार्तिक महीने की शुक्लपक्ष की दिव्तीया को मनाया जाता है....भाईदूज की पौराणिक कथाओं पर नज़र डालें तो उल्लेख किया गया है कि भाई-बहन, यम और यमुना कई वर्षों से नहीं मिले थें.... काफी वर्षों बाद यम अपनी बहन से मिलने आते हैं... इस दिन यमुना ने भाई के आने की ख़ुशी में स्नान करने के बाद पूजा कर विभिन प्रकार के स्वादिष्ट भोजन और मिष्ठान तैयार किया और भाई के आने के तत्पश्चात उन्होंने भाई को तिलक लगाकर मुँह मीठा करवाया और फिर भोजन करवाया। .... इनसबसे यम बहोत प्रसन्न हुए और बहन को कहा यमुना तुम्हे क्या चाहिए। ... बहन तुम मुझ से क्या वरदान पाना चाहती हो.... इसपर यमुना ने कहा... पुरे श्रद्धा और निष्ठां से जो बहने आज के दिन अपने भाई केलिए मंगल कामना करेगी उसे यम का डर ना हो... ये सुनकर यम ने बहन को आशीर्वाद देते हुए वहां प्रस्थान करगए, तबसे ही भाईदूज मानने की परम्परा चली आरही है..... कई राज्यों में कर्तित माह की शुक्लपक्ष की दिव्तीया को गाये के गोबर से यम और यमुना की आकृति बनाकर पूजा की जाती और फिर अपने भाई को तिलक लगाकर नारियल और मिठाई खिलाई जाती है.